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अच्छे दिनों पर आपकी क्या है राय हमें जरूर बताए- YOUR OPINION ON ACCHE DIN

Acche Din
Written by babajiacademy

अच्छे दिनों पर आपकी क्या है राय हमें जरूर बताए- YOUR OPINION ON ACCHE DIN


हैलो नमस्कार दोस्तों अच्छे दिन जरूर आएंगे इन शब्दों को सुन सुन के और जगह जगह होर्डिंग पर देख देख कर हमारी तो आंखें थक गई और दिमाग मैं तो अब इस नाम को सुनते ही गुस्सा आ जाता है। लेकिन क्या आपको लगता है कि अच्छे दिन जिन का वादा प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने किया था वो अच्छे दिन कभी हकीकत में साकार हो सकते हैं। इन सभी बातों को जानेंगे हम इस पेज में।
सबसे पहले बताना चाहता हूं कि भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने हमारे भारत  के हर उस नागरिक से सन 2014 में जो वादा किया था वह वादा शायद प्रधानमंत्री मोदी जी भूल गए हों लेकिन हर उस शख्स को मोदी जी के वह मीठे वचन आज भी याद है। जब भी कहीं हम यह लिखा हुआ पाते हैं “अच्छे दिन” तो हमारे माइंड में हमारे मस्तिष्क में बस एक ही तस्वीर और नाम बन के उभर आता है।
मोदी जी मेरे ख्याल से एक अच्छे राजनेता हैं। उनकी सोच की मैं काफी प्रशंसा करता हूं।  वो जो मेक इन इंडिया, स्वच्छ भारत तथा अन्य बड़ी-बड़ी परियोजनाएं चलाकर हमारे देश को एक नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहते हैं यह बहुत अच्छा है। लेकिन क्या आप जानते हैं  कल किसने देखा है, हमारी तो यही सोच है। हमें तो आज अच्छे दिन चाहिए। बिल्कुल सही बात है कल का क्या भरोसा। हमें तो अपना वर्तमान सुखदायी चाहिए। अधिकांश लोगों की यही सोच है।
मोदी जी जान चुके हैं कि जनता क्या सुनना चाहती है इसीलिए वह जनता को वही शब्द सुनाते हैं जो वह सुनना चाहती है। उन्होंने कोई ऐसा देश नहीं छोड़ा जहां की उन्होंने यात्रा न की हो। बचे हुए कुछ देश हैं अभी तो उनका भी वह इस 1 साल के समय अंतराल में अपना सफर पूरा कर लेंगे और जनता को क्या है 1 साल बाद मोदीजी  नहीं तो फिर कोई और सही वह भी ऐसे ही अच्छे दिनों का वादा करेगा और जनता फिर से उन अच्छे दिनों  का इंतजार करेगी।
इसका मतलब यह है कि वेवकूफ हम नहीं ये राजनेता हैं। चालाक हम नहीं ये हैं। हम तो बस अपना काम करते हैं बस इनकी मीठी मीठी बातों में आकर इनको चुन लेते हैं और 5 साल तक झेलते हैं। मोदी जी की सरकार आने से पहले हम में से किसी भी भारतीय ने ऐसा नहीं सोचा होगा कि अब अच्छे दिन दूर नहीं।
उन्होंने कुछ बातें ही इस तरह से की थी कि हर इसान को उन पर पूरा भरोसा हो गया था। और हो भी क्यूं ना क्यूं कि जो इसान 15 साल से गुजरात का मुख्यमंत्री बना बैठा है वो थोड़े ही ना हमसे झूठ बोलेगा।  आज आलम ये है कि हर भारतीय को उन्होनें वही अपनी मीठी मीठी प्यारी प्यारी बातों से हमें इस तरह  से उलझा कर रखा है कि जैसे सच में ही कोई जादू होने बाला है। पहले वो कहते थे सत्ता आने दो तब अच्छे दिन आएगे। आज वो कहते हैं 2022 या 2023 आने दो तब अच्छे दिन आएंगे। मैं तो बस यही कहूंगा अगर अगर आपमें हिम्मत नहीं है अच्छे दिन को लाने की तो कम से कम झूठ तो मत बोला कीजिए। 
आगे उनके दिमाग में क्या चल रहा है वह किस  तरह के अच्छे दिन लाना चाहते हैं और आखिर कब आएंगे वो अच्छे दिन वो तो वही जानें तथा वह किस तरह का भारत हमारे भविष्य में बनाना चाहते हैं वह तो मैं नहीं जानता। अगर  उनकी सोच और उनके इरादे नेक हैं तो मैं ही नहीं मेरे देश का हर एक नागरिक हमारे प्रधानमंत्री जी के साथ है लेकिन अगर उनके दिमाग में थोड़ी सी भी सोच इसके विपरीत है तो मैं तो यही कहूंगा कि अगर मोदी जी ने हमें ऐसी-ऐसी बातें बोलकर हमें अच्छे  दिनों का सपना दिखाकर हमें अपनी योजनाओं में उलझा के रखा तो मेरे देश का कोई भी राजनेता इस आने वाले भविष्य में हमारे देश में हमें अच्छे दिन नहीं दिखा सकता। हर राजनेता केवल अपने स्वार्थ तक ही सीमित रह सकता है। लेकिन अगर आपको लगता है कि हमारे आने वाले भविष्य में मोदी जी से भी अच्छे राजनेता आ सकते हैं जो हमारे भारत के विकास की बातें ही नहीं बल्कि उसे हकीकत में सबके सामने करके दिखाएंगे तो आप नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में हमें अपनी राय बता सकते हैं।
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babajiacademy

2 Comments

  • हमारे ज्यादातर प्रधानमंत्री विदेशी कंपनियों को इस देश का भला करने के लिए आमंत्रित करते हैं पर क्या ये सही है जरा सोचो अंग्रेजों के ज़माने में सिर्फ एक ईस्ट इंडिया कंपनी भारत से २५० सालों तक गुलामी करवा सकती है तो आज तो ४००० से भी ज्यादा विदेशी कंपनिया हमें लूट रही हैं.
    सोचो क्या हाल होगा आने वाले दिनों में भारत का.अगर हमें उन्नति करनी ही है तो क्यों न अपने देश की छोटी कंपनियों को प्रमोट करें .स्वदेशी माल अपनाये हमें विदेशी कोलगेट खरीदने की क्या जरूरत जब सबसे अच्छी नीम की दातुन होती हैं .
    अगर हम विदेशी कंपनी के माल लेना बंद कर दें तो इस देश का ७५% धन हम विदेश जाने से रोक सकते हैं .कोई राजनीतिज्ञ अच्छे दिन नहीं ला सकता है वो हमें खुद लाना होगा .

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