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How the President of India is elected भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की पद्दति

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How the President of India elected भारत के राष्ट्रपति के चुनाव की पद्दति


चलिए जानते हैं हमारे देश के राष्ट्रपति जी के बारे में। कैसे होता है उनका चुनाव, क्या क्या काबिलियत चहिए एक नागरिक में ताकि वह भारत के राष्ट्रपति बनने के योग्य हो।

  • राष्ट्रपति का निर्वाचन जनता प्रत्यक्ष रूप से नहीं करती है। उसका चुनाव अप्रत्यक्ष रूप से किया जाता है।
  • राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचन मंड़ल के सदस्य़ों द्वारा होता है, इसमें निम्न लोग शामिल होते हैं।

1.संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य (Elected Members of Both the Houses i.e. Lok Sabha and Rajya Sabha).

2.राज्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्य (Elected Members of State Legislative Assembly)

3.केन्द्र शासित प्रदेशों के निर्वाचित सदस्य (Elected members Legislative Assemblies of Union Territories of Delhi and Puducherry).


Note:

  • ये सभी लोग निर्वाचन में भाग नहीं लेते हैं अपितु जनता के द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव करवाते हैं।
    ड़ाक्टर जाकिर हुसैन एक ऐसे राष्ट्रपति हैं जिन्होनें पद ग्रहण करने से पूर्व ही भारत रत्न प्राप्त किया था।
  • राष्ट्रपति चुनाव से सम्वंधित विवादों की जांच व फैसले उच्चतम न्यायालय में होते हैं
  • यदि उच्चतम न्यायालय यानी Supreme Court किसी राष्ट्रपति की नियुक्ति को अवैध बताता है तो घोषणा से पहले राष्ट्रपति द्वारा किया गया कोई भी कार्य अवैध नहीं माना जाएगा।

राष्ट्रपति चुनाब के लिए अह्रताऐं, एवं शर्तें/Qualification and Conditions for President’s Eleection

  • 1.वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • 2.उम्र-35 साल पार कर चुका हो।
  • 3.लोक सभा का सदस्य बनने के लिए अह्रित हो।
  • 4.कहीं भी लाभ के पद पर ना हो।
  • 5.नामांकन के लिए उसके कम से कम 50 प्रस्तावक व 50 अनुमोदक हो (1997 से पहले इसकी संख्या10 10 भी)।
  • 6.प्रत्येक उम्मीदवार को RBI में 15 हजार रुपए जमानत के रूप में रखने पड़ते हैं(1997 से पहले 2500/- थी)
  • यदि उम्मीदवार कुल डाले गए मतों का 1/6 भाग प्राप्त करने में असमर्थ होता है तो यह राशि जब्त हो जाती है।

राष्ट्रपति चुनाब के लिए निम्नलिखित शर्तें लागू होती हैं:-

  • उच्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश Chief Justice of India
  • उनकी अनुपस्थिति में वरिष्ठतम न्यायाधीश द्वारा

कुछ अनिवार्य शर्ते:-

  • संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं हो
  • यदि हो तो त्यागपत्र देना होगा पदग्रहण से पहले
  • लाभ का पद धारण नहीं किए हो
  • उसे राष्ट्रपति भवन आवंटित होगा विना किराया चुकाए
  • उसका वेतन 1.5 लाख रूपए है 2008 से पहले 50 हजार था

ये तो ती कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जो कि राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित हैं। अगर आपके पास भी कुछ अलग है तो आप नीचे कमेंट कर बता सकते हैं।

तथा इसी तरह अन्य विषयों पर जादा जानकारी हेतु यहां दबाएं

How was Post Rigvedic Period उत्तर वैदिक काल कैसा था

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How was Post Rigvedic Period उत्तर वैदिक काल कैसा था


चलिऐ जानते हैं उत्तर वैदिक काल के बारे में क्या, उस समय के समाज व उसकी संस्कृति के बारे में। उन समय किस प्रकार के मनुष्य रहते थे, क्या था उनका वेषभूषा तथा अपने खान पान के लिए किस पर निर्भर रहते थे।

  • अत्तर वैदिक काल का समय 1000-600 ईसा पूर्व बताया गया है
  • उत्तर वैदिक काल गंगा नदी के किनारे हुआ था
  • यह काल कठिनाई का समय था
  • इस काल में विधवा विवाह बंद, स्त्रियों की पढ़ाई लिखाई बंद तथा सती प्रथा भी इसी काल से शुरू हो गया था।
  • बाल विवाह इसी काल से चालू हुआ था।
  • इस काल के देवता प्रजापति थे।
  • महाकाव्य दो हैं- रामायण तथा महाभारत।

पशु:-

  • उत्तर वैदिक का के लोग को पवित्र पशु मानते था।
  • इस समय के लोग घोड़ा इनका पालतू जानवर के रूप में था
  • हाथी तथा व्यघ्र का इस काल में कोई उल्लेख नहीं मिलता है।

अन्य जानकारी:-

  • उत्तर वैदिक काल में राजा के राज्याभिषेक हेतु राजसूय यज्ञ करवाया जाता था।
  • इस काल में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर थी
  • यह ग्रामीण सभ्यता थी
  • कृषि मुख्य व्यवसाय था तथा चावल की खेती होती थी
  • इस काल में हल को सिरा तथा हल रेखा को सीता कहा जाता था
  • उत्तरवैदिक काल की मुद्रा निष्क और शतमान थीं।
  • उत्तरवैदिक काल में कौशाम्वी नगर में प्रथम बार पक्की इंटों का प्रयोग किया गया था
  • महाभारत का पुराना नाम जयसंहिता है।
  • महाभारत विश्व का सवसे बड़ा महाकाव्य है।
  • गौत्र नामक संस्था का जन्म इसी काल से हुआ है।

ये जानकारी विभिन्न श्रौत से प्राप्त की गई है। अगर आपके पास भी इसके अलावा कुछ जानकारी है तो नीचे दिये गए कमेंट में बताकर हम तक जरूर शेयर करें। और एक बात और इस पेज को आप व्हाट्सएप, फेसबुक, गूगल प्लस तथा ट्विटर पर शेयर भी कर सकते हैं ताकि आपके अलावा अन्य लोग भी इस काल के बारे में जान सकें.


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Arabian Travellers who visited India- अरबी यात्री जो भारत आए

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Arabian Travellers who visited India- अरबी यात्री जो भारत आए


चलिए जानते हैं उन महान अरबी लेखकों के बारे में जो हमारे भारत देश मे पधारे तथा अपने द्वारा रचित पुस्तक में महारे भारत के बारें में कुछ अमूल्य बातें लिखी हैं जो हर भारतीय को पढ़नी चाहिए।

अलबरूनी:-

  • अलबरूनी हमारे भारत देश में महूद गजनवी के साथ आया था
  • तहकीक-ए-हिंद (भारत की खोज) या किताब-उल-हिंद पुस्तक अलबरूनी के द्वारा रचित है।
  • यह पुस्तक आज भी इतिहासकारों के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है।
  • यह पुस्तक एक विस्तृत गृन्थ है जो धर्म और दर्शन, त्योहारों, खगोल विज्ञान, कीमियां, मापतंत्र विज्ञान आदि विषयों के आधार पर है
  • यह पुस्तक 80 अद्यायों में विभाजित है।
  • इस पुस्तक में राजपूत कालीन समाज, धर्म, जाति, रीती रिवाज आदि के बारे में विस्तृत से जानकारी दी गई है।

इब्न- बतूता:- 

  • इब्न-बतूता नें अपनी यात्रा का वर्णन अरबी भाषा में लिखा है तथा जिसे रिहला कहा जाता है।
  • इसनें अपने वृस्तांत में भारत की चौदहवीं सताब्दी के सामाजित तथा सांस्कृतिक जीवन के बारे में ही रोचत तरीके से जानकारी प्रदान की है।
  • वह 1333 में दिल्ली पहुंचा तथा वहां उसकी काविलियत को देखते हुए सुल्तान मुहम्मद विन तुगलक नें उसे दिल्ली का काजी या न्यायाधीश नियुक्त कर दिया

इसके अलावा अगर आपके पास भी कोई रोचक जानकारी इनके बारे में है तो आप उसे नीचे कमेंट करके बता सकते है।

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Chinese Travellers who visited India चीनी यात्री जो भारत आए

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Chinese Travellers who visited India चीनी यात्री जो भारत आए


Hello and welcome to this page. चलिए देखते हैं और जानते हैं आखिर कौन थे वो चीनी यात्री जिन्होने भारत का भ्रमण किया तथा अपने साथ इस देश की कुछ यादों और अदभुत चीजों को अपने साथ लेकर गए जिसके वाद उन्होनें अपने द्वारा रचित पुस्तक में भारत भूमि के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।

सबसे पहला चीनी यात्री जो भारत आया- The First Chinese Traveller who visited India:-

  • ह्वेनसांग (Hsuan-Tsang) यह पहला चीनी यात्री था जो भारत आया
  • वह 63 वर्ष की आयु में भारत आया था तथा जव वापस गया उस समय उसकी आयु लगभग 77 वर्ष थी
  • ह्वेनसांग राजा हर्षवर्धन के शासन काल में  सन  629 ईसवी में चीन से भारत के लिए रवाना हुआ था।
  • वह एक वर्ष की यात्रा करने के वाद सर्वप्रथम कपिषा में पहुंचा।
  • वह भारत में लगभग 15 वर्षों तक रहा तथा 645 ईसवी में चीन लौट गया।
  • वह बिहार में नालंदा जिला स्थिद विश्वविध्यालय में अध्ययन करने तथा भारत से बौद्ध ग्रंथों को एकत्र कर ले जाने के लिए आया था।
  • उस समय नालंदा विश्वविध्यालय के कुलपति आचार्य शीलभद्र थे।
  • इसके भ्रमण का वृस्तांत सि-यू-की नाम से प्रसिद्ध है
  • सि-यू-की में 138 देशों का विवरण मिलता है। इसने हर्षकालीन समाज धर्म तथा राजनीति के बारे में वर्णन किया है।
  • इसके अनुसार सिंध का राजा सूद्र था।

फाहियान:-

  • यह चीनी यात्री राजा गुप्त नरेश चन्द्रगुप्त के शासन काल में उनके दरबार में आया था।
  • फाहियान नें अपने वृस्तांत में मध्य प्रदेश के समाज एवं संस्कृति के बारे में बर्णन किया है।
  • इसनें मध्य प्रदेश की जनता को सुखी व सम्रद्ध बताया है।

संगुयन:-

  • यह 518 इसवी में भारत आया।
  • संगुयन नें तीन वर्ष तक भारत की यात्रा की।
  • इसनें अपनी यात्रा के दौरान बौद्ध धर्म की प्राप्तियां एकत्रित की।

इत्सिंग:-

  • यह सातवीं सदी के अन्त में भारत आया।
  • इत्सिंग नें अपने विवरण में नालंदा विश्वविद्यालय तथा अपने समय के भारत का वर्णन किया है।

ये तो थे चीनी यात्री जो प्राचीन भारत के समय इस देश की पावन भूमि पर पधारे। अगर आप के पास भी इनके बारे में इसके अलावा कुछ जानकारी है तो आप नीचे कमेंट के जरिये हम तक पहुंचा सकते है।

 

 

16 Mahajanapadas of India भारत के 16 महाजनपद

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16 Mahajanapadas of India भारत के 16 महाजनपद


चलिए जानते हैं हमारे भारतवर्ष के 16 महाजनपदों के बारे में। उनकी राजधानी तथा क्षेत्र के बारे में कुछ जानकारी।

संख्या महाजनपद राजधानी क्षेत्र
01. अंग चंपा भागलपुर, मुंगेर (बिहार)
02. मगध गिरिब्रज या राजगृह पटना, गया (बिहार)
03. काशी वाराणसी वाराणसी के आस-पास (उत्तर प्रदेश)
04. वत्स कौशाम्बी इलाहाबाद के आस-पास (उत्तर प्रदेश)
05. वज्जि वैशालीया/विदेह/मिथिला मुजफ्फरपुर (उत्तर प्रदेश)
06. कोशल श्रावस्ती फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)
07. अवन्ति उज्जैन या माहिस्मति मालवा (मध्य प्रदेश)
08. मल्ल कुशावती देवरिया (उत्तर प्रदेश)
09. पांचाल अहिच्छत्र, काम्पिल्य बरेली, बदायूं, फर्रूखाबाद (उत्तर प्रदेश)
10. चेदि शत्तिमती बुंदेलखंड़ (उत्तर प्रदेश)
11. कुरू इन्द्रप्रस्थ आधुनिक दिल्ली, मेरठ एवं हरियाणा के कुछ क्षेत्र
12. मत्स्य विराटनगर जयपुर एवं हजारा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश)
13. कम्बोज हाटक राजोरी एवं हजारा क्षेत्र (उत्तर प्रदेश)
14. शूरसेन मथुरा मथुरा (उत्तर प्रदेश)
15. अश्मक पोटली या पोतन गोदावरी नदी क्षेत्र (दक्षिण भारत के एकमात्र जनपद)
16. गांधार तक्षशिला रावलपिंड़ी एवं पेशावर (पाकिस्तान)

यह जानकारी विभिन्न श्रोत से प्राप्त की गई है। अगर आपके पास भी कुछ इसके अलावा है तो आप नीची कमेंट कर बता सकते हैं। इस को अपने दोस्तों तथा उन लोगों तक शेयर करें जो किसी भी परीक्षा की तैयारी कर रहे है।

आप इसी तरह अन्य विषयों पर भी इस वैवसाइट के जरिए जानकारी ले सकते हैं।

अन्य जानकारी के लिए यहां दबाएं

How was Rigvedic period ऋग्वैदिक काल कैसा था

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How was Rigvedic period ऋग्वेदिक काल कैसा था


आइऐ देखते हैं ऋग्वैदिक काल के समय क्या क्या प्रचलन था, कैसा समाज था उस समय आदि चीजों को।

  1. ऋग्वैदिक काल मुख्यतः एक कबीलाई व्यवस्था वाला शासन था जिसमें सैनिक भावना प्रमुख थी।
  2. राजा को गोमत भी कहा जाता था।
  3. वैदिक काल में राजतंत्रात्मक प्रणाली प्रचलित थी। इसमें शासन का प्रमुख राजा होता था।
  4. राजा वंशानुगत तो होता था परन्तु जनता उसे हटा सकती थी। वह क्षेत्र विशेष का नहीं बल्कि जन विशेष का प्रधान होता था।
  5. राजा युद्ध का नेतृत्वकर्ता था। उसे कर वसूलने का अधिकार नही था। जनता द्वारा स्वेच्छा से दिए गए भाग एवं से उसका खर्च चलता था।
  6. सभा, समिति तथा विदथ नामक प्रशासनिक संस्थाएं थीं। अथर्ववेद में सभा एवं समिति को प्रजापति की दो पुत्रियाँ कहा गया है।
  7. समिति का महत्वपूर्ण कार्य राजा का चुनाव करना था। समिति का प्रधान ईशान या पति कहलाता था। विदथ में स्त्री एवं पुरूष दोनों सम्मलित होते थे। नववधुओं का स्वागत, धार्मिक अनुष्ठान आदि सामाजिक कार्य विदथ में होते थे।
  8. सभा श्रेष्ठ लोंगो की संस्था थी, समिति आम जनप्रतिनिधि सभा थी एवं विदथ सबसे प्राचीन संस्था थी। ऋग्वेद में सबसे ज्यादा बार उल्लेख विदथ का 122 बार हुआ है।
  9. सैन्य संचालन वरात, गण व सर्ध नामक कबीलाई संगठन करते थे।

    ऋग्वैदिक काल की सामजिक स्थिति-

  10. ऋग्वेद के दसवें मंडल में चार वर्णों का उल्लेख मिलता है। वर्ण व्यवस्था कर्म आधारित थी।
  11. समाज पितृसत्तात्मक था। संयुक्त परिवार प्रथा प्रचलित थी।
  12. परिवार का मुखिया ‘कुलप’ कहलाता था। परिवार कुल कहलाता था। कई कुल मिलकर ग्राम, कई ग्राम मिलकर विश, कई विश मिलकर जन एवं कई जन मिलकर जनपद बनते थे। अतिथि सत्कार की परम्परा का सबसे ज्यादा महत्व था।
  13. एक और वर्ग ‘ पणियों ‘ का था जो धनि थे और व्यापार करते थे।
  14. भिखारियों और कृषि दासों का अस्तित्व नहीं था।
  15. संपत्ति की इकाई गाय थी जो विनिमय का माध्यम भी थी।
  16. अस्प्रश्यता, सती प्रथा, परदा प्रथा, बाल विवाह, का प्रचलन नहीं था।
  17. शिक्षा एवं वर चुनने का अधिकार महिलाओं को था।
  18. विधवा विवाह, महिलाओं का उपनयन संस्कार, नियोग गन्धर्व एवं अंतर्जातीय विवाह प्रचलित
    था।
  19. वस्त्राभूषण स्त्री एवं पुरूष दोनों को प्रिया थे। जौ (यव) मुख्य अनाज था।
  20. शाकाहार का प्रचालन था। सोम रस (अम्रित जैसा) का प्रचलन था।
  21. * नृत्य संगीत, पासा, घुड़दौड़, मल्लयुद्ध, शुइकर आदि मनोरंजन के प्रमुख साधन थे।
  22. अपाला, घोष, मैत्रयी, विश्ववारा, गार्गी आदि विदुषी महिलाएं थीं।

आर्थिक स्थिति-

  • अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार पशुपालन एवं कृषि था।
  • ज्यादा पालतू रखने वाले गोमत कहलाते थे। चारागाह के लिए ‘ उत्यति ‘ या ‘ गव्य ‘ शब्द काप्रयोग हुआ है।
  • दूरी को ‘ गवयुती ‘, पुत्री को दुहिता (गाय दुहने वाली) तथा युद्धों के लिए ‘ गविष्टि ‘ का प्रयोग होता था।
  • राजा को जनता स्वेच्छा से भाग नजराना देती थी।
  • आवास घास-फूस एवं काष्ठ निर्मित होते थे।
  • ऋण लेने एवं देने की प्रथा प्रचलित थी जिसे ‘ कुसीद ‘ कहा जाता था।
  • बैलगाड़ी, रथ एवं नाव यातायात के प्रमुख साधन थे।

  • कृषि-

  • सर्वप्रथम शतपथ ब्राम्हण में कृषि की समस्त प्रक्रियाओं का उल्लेख मिलता है।
  • ऋग्वेद के प्रथम और दसम मंडलों में बुआई, जुताई, फसल की गहाई आदि का वर्णन है।
  • ऋग्वेद में केवल यव (जौ) नामक अनाज का उल्लेख मिलता है। ऋग्वेद के चौथे मंडल में कृषि का वर्णन है।
  • परवर्ती वैदिक साहित्यों में ही अन्य अनाजों जैसे गेहूं (गोधूम), ब्रीही (चावल) आदि की चर्चा की गई है।
  • काठक संहिता में 24 बैलों द्वारा हल खींचे जाने का, अथर्ववेद में वर्षा, कूप एवं नाहर का तथा यजुर्वेद में हल का ‘ सीर ‘ के नाम से उल्लेख है। उस काल में कृत्रिम सिंचाई की व्यवस्था भी थी।

  • पशुपालन-

  • पशुओं का चारण ही उनकी आजीविका का प्रमुख साधन था।
  • गाय ही विनिमय का प्रमुख साधन थी।
  • प्रिय पशु घोड़ा था
  • ऋग्वैदिक काल में भूमिदान या व्यक्तिगत भू-स्वामित्व की धारणा विकसित नही हुई थी।

  • व्यापार-

  • आरम्भ में अत्यन्त सीमित व्यापार प्रथा का प्रचालन था।
  • व्यापार विनिमय पद्धति पर आधारित था।
  • समाज का एक वर्ग ‘पाणी’ व्यापार किया करते थे।
  • राजा को नियमित कर देने या भू-राजस्व देने की प्रथा नहीं थी।
  • राजा को स्वेच्छा से भाग या नजराना दिया जाता था।
  • पराजित कबीला भी विजयी राजा को भेंट देता था।
  • अपने धन को राजा अपने अन्य साथियों के बीच बांटता था।

  • धातु एवं सिक्के-

  • ऋग्वेद में उल्लेखित धातुओं में सर्वप्रथम धातू, अयस (ताँबा या कांसा) था।
  • वे सोना (हिरव्य या स्वर्ण) एवं चांदी से भी परिचित थे।
  • लेकिन ऋग्वेद में लोहे का उल्लेख नहीं है।
  • ‘निष्क ‘ संभवतः सोने का आभूषण या मुद्रा था जो विनिमय के काम में भी आता था।

  • उद्योग-

  • ऋग्वैदिक काल के उद्योग घरेलु जरूरतों के पूर्ति हेतु थे।
  • बढ़ई एवं धूकर का कार्य अत्यन्त महत्वपूर्व था।
  • अन्य प्रमुख उद्योग वस्त्र, बर्तन, लकड़ी एवं चर्म कार्य था।
  • स्त्रियाँ भी चटाई बनने का कार्य करतीं थीं।

  • धार्मिक स्थिति-

  • आर्य एकेश्वरवाद में विश्वास करते थे।
  • यहाँ प्राकृतिक मानव के हित के लिये हो ईश्वर से कामना की जाती थी।
  • वे मुख्या रूप से केवळ बर्ह्मान्ड के धारण करने वाळे एकमात्र परमपिता परमेश्वर के पूजक थे।
  • वैदिक धर्म पुरूष प्रधान धर्म था। आरम्भ में स्वर्ग या अमरत्व की परिकल्पना नहीं थी।
  • वैदिक धर्म पुरोहितों से नियंत्रित धर्म था। पुरोहित ईश्वर एवं मानव के बीच मध्यस्थ था।
  • वैदिक देवताओं का स्वरुप महिमामंडित मानवों का है। ऋग्वेद में 33 देवो (दिव्य गुणो से युक्त पदार्थो) का उल्लेख है।

  • ऋग्वैदिक कालीन देवता

  • इन्द्र- युद्ध का देवता
  • अग्नि- देवता एवं मनुष्य के बीच मध्यस्थ
  • वरुण- प्रथ्वी एवं सूर्य के निर्माता, समुद्र का देवता, विश्व के नियामक एवं शासक, सत्य का प्रतीक, ऋतु परिवर्तन एवं दिन-रात का कर्ता।
  • घौ- आकाश का देवता (सबसे प्राचीन)
  • सोम- वनस्पति का देवता
  • उषा- प्रगति एवं उत्थान देवता
  • आश्विन- विपत्तियों को हरनें बाला देवता।
  • पूषन- पशुऔं का देवता।
  • विष्णु- विश्व के संरश्रक एवं पालनकर्ता।
  • मरूत- आंधी तूफान के देवता।

  • ऋग्वैदिक कालीन नदियां

    प्राचीन नाम आधुनिक नाम
    क्रुभ कुर्रम
    कुभा काबुल
    विस्तता झेलम
    आस्किनी चिनाव
    परुषणी रावी
    शतुद्रि सतलज
    विपाशा व्यास
    सदानीरा गंड़क
    दृसध्दती घग्घर
    गोमती गोमल
    सुवस्तु स्वात

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The most important points you should know about India’s first Bullet Train

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The most important points you should know about India’s first Bullet Train


  • Prime Minister Narendra Modi and his counterpart from Japan Shinzo Abe laid the foundation for the country’s first high speed train project
  •  The project of India’s first bullet train will connect Ahmedabad to Mumbai
  • Prime Minister Modi described the bullet train as “symbol of New India”.
  • “The high speed trains will usher in next generation economic growth with multiple employment opportunities.
  • The place of foundation of India’s first bullet train was near Sabarmati Railway station in Ahmedabad.
  • It’s Length is 508 km long project to be built with estimated investment of ₹ 1,08,000 crore.
  • Japan will pay Upto 80 percent of the funded project with a soft loan of Rs.88,000 crore at interest rate of 0.1 per cent with repayment period 50 years.
  • “It is for the first time in history in India that an infrastructure project is being funded on such favourable terms.
  • A release issued by the Gujarat government stated, claiming the entire project would be funded without putting any strain on existing financial resources of the country.

Testing and commissioning:

The testing and commissioning date of India’s first bullet train has been advance from December 2023 to August 2022

Some Important Features about the Project:

  • This project will connect 02 states from Mumbai to Ahmedabad, Maharashtra 155.642 kms and Gujarat 350.530 kms and one Union Territory of Dadra and Nagar Haveli 2 kms.
  • The double track project involves 21 km tunnel with seven km under sea tunnel at Thane Creek in Mumbai.
  • There will be 12 stations starting from underground station in Mumbai while remaining stations at Thane, Virar, Boisar, Vapi, Bilimora, Surat, Bharuch, Vadodara, Anand, Ahmedabad, and Sabarmati will be elevated.
  • As part of the project, a dedicated High Speed Rail Training Institute is being developed in Vadodara and will become functional by end of 2020.
  • Around 4000 staff members will be trained in this institute and they will be responsible for operation and maintenance of the ambitious project, which will usher in the new era of high speed railways in the country.
  • The private sector companies will manufacture railway components.
  • . This project is likely to generate employment for about 20,000 workers during the construction phase, who will be trained specialist to take up construction of such projects in India,” the release stated.
  • The maximum speed of Country’s first bullet train is- 350 kmph while Maximum Operating speed of 320 kmph.
  • And the  Journey time: – 2.07 hrs (limited stops), 2.58 hrs (stopping at all stations).
  • The Maintenance of Trains – Sabarmati (Depot & Workshop) and Thane Depot.
  • The Operations Control Centre (OCC) of High Speed Railway training Centre is located at Vadodara.

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The Best News website award winner is The Hindu

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The Best News website award winner is The Hindu


The Hindu Group has been awarded two golds and a silver

  • The Hindu group has been awarded the best News website award at the South Asian Digital Media Awards at the WAN-IFRA (World Association of Newspapers and News Publishers) India 2017 conference in Chennai.
  • The Hindu won the Gold award for the Best News Website.
  • The Hindu’s site, which is India’s oldest newspaper website, is fully responsive, adapting seamlessly to different devices and screen sizes.
  • It is designed by Itu Chaudhuri.
  • The website’s navigation and information architecture is designed to help readers easily and intuitively access content.
  • The www.thequint.com and www.ndtv.com won the silver and bronze in this category.
  • Sportstarlive.com won the silver award in the Best in Lifestyle, Sports or Entertainment Website category.
  • Entries in these two categories were evaluated based on criteria such as strong content quality, consistency in user experience, innovative design, use of multimedia and ease of navigation.
  • The gold award in the Best Innovation to Engage Youth Audiences category went to Youngworldclub.com, it is The Hindu’s Group’s learning portal for children.
  • The evaluation in this category was based on effectiveness in engaging youth audiences, especially children and teenagers.
  • This year, the winners of South Asian Digital Media Awards were chosen from nine categories — best news website, best in lifestyle, sports or entertainment website, best digital advertising campaign, best use of online video, best data visualisation, best news mobile service, best lifestyle, sports or entertainment mobile services, best innovation new product, best in social media engagement, and best innovation to engage youth audiences.

 

  • Who Presented the Award:
  • The awards, was presented by WAN-IFRA and Google, recognise publishers
  • WAN-IFRA’s Digital Media Awards are presented in every region across the world and the winners from each region subsequently compete for the World Digital Media Awards.

25 Person killed in Malaysia’s Kuala Lumpur school fire

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25 Person killed in Malaysia school fire


  • A fire department official in Malaysia says a fire at an Islamic religious school on the outskirts of Kuala Lumpur
  • It has killed at least 25 people, mostly teenagers.
  • The fire started early on Thursday at the top floor of the three-storey building that is believed to be a dormitory.
  • The dead were 23 teenage boys and two adults.
  • The official declined to be named as he isn’t authorized to give a statement.
  • The  bodies were piled on top of each other, indicating a possible stampede as people tried to flee the fire.
  • He said police are still confirming the final numbers and cause of the fire.

This is only for the short information and the detailed information will be provided soon after getting it from the official.

What is Purana पुराण क्या है

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What is Purana पुराण क्या है


चलिए जानते हैं पुराण क्या what is Purana है इनका महत्व व कितनी है इनकी संख्या

  • पुराण अधिकतर संस्कृत स्लोक में लिखे गए हैं।
  • पुराण की संख्या 18 है, लेकिन केवल  इनमें से 05- मतस्य, वायु, विष्णु, ब्राह्मण एवं भागवत में ही राजाओं की वंशावली पायी जाती है।
  • मतस्य पुराण सबसे प्राचीन पुराण है।
  • स्त्रियां तथा शूद्र जिन्हैं वेद पढ़नें की अनुमति नहीं थी वे भी पुराण सुन सकते थे।
  • पुराणों का पाठ पुजारी मंदरों में किया करते थे

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What is Vedanga वेदांग क्या है

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What is Vedanga वेदांग क्या है


चलिए जानते हैं आखिर वेदाग क्या है, क्या है इसकी संख्या।

  • युगान्तर में वैदिक अध्ययन के लिए छः विधाओं (शाखाओं) का जन्म हुआ जिन्हें ‘वेदांग’ कहते हैं।
  • वेदांग का शाब्दिक अर्थ है वेदों का अंग, तथापि इस साहित्य के पौरूषेय होने के कारण श्रुति साहित्य से पृथक ही गिना जाता है।
  • वेदांग को स्मृति भी कहा जाता है, क्योंकि यह मनुष्यों की कृति मानी जाती है।
  • वेदांग सूत्र के रूप में हैं इसमें कम शब्दों में अधिक तथ्य रखने का प्रयास किया गया है। वेदांगों की संख्या 6 है

    1. शिक्षा- स्वर ज्ञान (Deals with Phonetics, helps to talk, Tongue of Video)
    2. कल्प- धार्मिक रीति एवं पद्धति (Deals with Rituals
    3. निरुक्त- शब्द व्युत्पत्ति शास्त्र (Deals with Etymology origin of word)
    4. व्याकरण- व्याकरण (Grammar)
    5. छंद- छंद शास्त्र (Metrics)
    6. ज्योतिष- खगोल विज्ञान (Astronomy)

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What is Upanishads उपनिषद क्या है

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What is Upanishads उपनिषद क्या है


चलिए जानते हैं उपनिषद क्या है तथा कितनी है इनकी संख्या और क्या है इनका महत्व

  • उपनिषद प्राचीनतम दार्शनिक विचारों का संग्रह है।
  • उपनिषदों में ‘वृहदारण्यक’ तथा ‘छान्दोन्य’, सर्वाधिक प्रसिद्ध हैं।
  • इन ग्रन्थों से बिम्बिसार के पूर्व के भारत की अवस्था जानी जा सकती है।
  • परीक्षित, उनके पुत्र जनमेजय तथा पश्चातकालीन राजाओं का उल्लेख इन्हीं उपनिषदों में किया गया है।
  • इन्हीं उपनिषदों से यह स्पष्ट होता है कि आर्यों का दर्शन विश्व के अन्य सभ्य देशों के दर्शन से सर्वोत्तम तथा अधिक आगे था।
  • आर्यों के आध्यात्मिक विकास, प्राचीनतम धार्मिक अवस्था और चिन्तन के जीते-जागते जीवन्त उदाहरण इन्हीं उपनिषदों में मिलते हैं।
  • कुल उपनिषदों की संख्या 108 है।
  • मुख्य रूप से शास्वत आत्मा, ब्रह्म, आत्मा-परमात्मा के बीच सम्बन्ध तथा विश्व की उत्पत्ति से सम्बंधित रहस्यवादी सिधान्तों का विवरणदिया गया है।
  • “सत्यमेव जयते” मुण्डकोपनिषद से लिया गया है।
  • मैत्रायणी उपनिषद में त्रिमूर्ति और चार्तुआश्रम सिद्धांत का उल्लेख है।

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Who was Brahman ब्राह्मण कौन थे

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Who was Brahman ब्राह्मण कौन थे

ये प्रथाएं यज्ञ से संबंधित हैं।

  • वैदिक मन्त्रों तथा संहिताओं की गद्य टीकाओं को ब्राह्मण कहा जाता है।
  • पुरातन ब्राह्मण में ऐतरेय, शतपथ, पंचविश, तैतरीय आदि विशेष महत्वपूर्ण हैं।
  • ब्राह्मण ग्रंथों की रचना संहिताओं के कर्मकांड की व्याख्या करने के लिए की गई थी।
  • यह मुख्यतः गद्य शैली में लिखित है।
  • ब्राह्मण ग्रंथों से हमें बिम्बिसार के पूर्व की घटना का ज्ञान प्राप्त होता है।

एतरेय कौसितकी ब्राहम्ण

  • एतरेय ब्राह्मण में आठ मंडल हैं तथा पांच अध्याय हैं।
  • एतरेय कौसितकी ब्राहम्ण ऋग्वेद से संबंधित है।
  • इसे पञ्जिका भी कहा जाता है।
  • एतरेय ब्राह्मण सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण है
  • ऐतरेय ब्राह्मण में राज्याभिषेक के नियम प्राप्त होते हैं।

शतपथ ब्राह्मण

  • शतपथ ब्राह्मण में गंधार, शल्य, कैकय, कुरु, पांचाल, कोसल, विदेह आदि का उल्लेख होता है।
  • शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद से संबंधित है
  • शतपथ ब्राह्मण ऐतिहासिक दृष्टी से सर्वाधिक महत्वपूर्ण ब्राह्मण है।

गोपथ ब्राह्मण

  • सर्वाधिक परवर्ती ब्राह्मण गोपथ है
  • गोपथ ब्राह्मण अथर्ववेद से संबंधित है

आरण्यक ब्राह्मण

  • आरण्यक की रचना जंगल में ऋषियों द्वारा की गई थी।
  • इसका प्रमुख प्रतिपाद्य विषय रहस्यवाद, प्रतीकवाद, यज्ञ और पुरोहित दर्शन है।
  • वर्तमान में सात अरण्यक उपलब्ध हैं।
  • सामवेद और अथर्ववेद का कोई आरण्यक नहीं है।

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What is Atharvaveda अथर्ववेद क्या है

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What is Atharvaveda अथर्ववेद क्या है


हम सभी जानते हैं कि वेद चार प्रकार के होते हैं और अब तक हमनें जाना 03 वेदों के बारे में तो चलिए जानते हैं इस वेद के बारे में भी।

  • यह वेद अथर्व ऋषि द्वारा रचित है
  • इसमें रोग, निवारण, तंत्र, मंत्र, जादू टोना, वशीकरण, शाप, अाशीर्वाद, स्तुति, प्रायस्चित, अनुसंधान, विवाह, प्रेम, राजकर्म, मातृभूमि-महात्मय आदि विभिन्न विषयों से संबंध मंत्र तथा सामान्य मनुष्यों के विचारों, विश्वासों, अंधविश्वासों आदि का वर्णन है।
  • यह वेद 20 अध्यायों में संगठित है तथा इसमें 700 सूक्त तथा 6000 के लगभग मंत्र हैं
  • अथर्ववेद कन्याओं के जन्म की निंदा करता है।
  • इसी वेद में सभा तथा समिता की दो पुत्रियां कहा गया है।
  • सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद तथा सबसे बाद का वेद अथर्ववेद है।
  • इसे अनार्यों की कृति माना जाता है

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