Election Process in India- भारत में निर्वाचन पद्धति

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Election Process in India- भारत में निर्वाचन पद्धति


संविधान के भाग 15 में अनुच्छेद 324 से 329 तक में हमारे देश के निर्वाचन से संबंधित निम्न उपबंधों का उल्लेख किया गया है। संविधान (अनुच्छेद 324) देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के लिए स्वतंत्र निर्वाचन आयोग की व्यवस्था करता है। निर्वाचन आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त व दो निर्वाचन आयुक्त है।

संसद, राज्य विधायिका, राष्ट्रपति, तथा उपराष्ट्रपति के निर्वाचन की शक्ति निर्वाचन आयोग में है। लोक सभा व राज्य विधायिका में निर्वाचन वयस्क मताधिकार के आधार पर होता है मतलब जो 18 साल का भारतीय नागरिक हैं वही मतदान कर सकता है। संसद व राज्य  विधायिका के निर्वाचन पर प्रश्न नहीं लगाया जा सकता।

चुनावी याचिका पर सुनवाई केवल उच्च न्यायालय करता है, किंतु  अपील का अधिकार क्षेत्र केवल उच्चतम न्यायालय को है। निर्वाचन चिह्न आदेश 1968 निर्वाचन आयोग में पारित किया है। यह राजनीतिक दलों के पंजीकरण तथा मान्यता, निर्वाचन चिह्नों के आवंटन तथा उनके मध्य विवादों के निपटारे से संबंधित है। tricky maths book pdf in hindi

भारत के महान्यायवादी की शक्तियों के बारे में जाने

चुनाव तंत्र भारत का निर्वाचन आयोग- इसमें एक मुख्य चुनाव आयुक्त तथा दो चुनाव आयुक्त होते हैं। राष्ट्रपति की नियुक्ति करता है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी– यह अधिकारी चुनाव कार्यों का पर्यवेक्षण करने का अधिकृत है जिसका निर्वाचन आयोग अधीक्षण व निर्देशन तथा नियंत्रण करता है।

जिला निर्वाचन अधिकारी– यह मुख्य निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन तथा नियंत्रण में जिले के चुनाव का पर्यवेक्षण करता है तथा यह निर्वाचन आयोग के द्वारा राज्य सरकार के किसी अधिकारी में से चुना जाता है।

चुनाव अधिकारी– यह संसदीय अथवा विधानसभा क्षेत्र के चुनाव कार्य के संचालन के लिए उत्तरदाई होता है। इसका चयन निर्वाचन आयोग करता है।

चुनाव निबंधन पदाधिकारी– संसदीय चुनाव क्षेत्र में मतदाता सूची आदि को तैयार करने के लिए यह उत्तरदाई होता है।

पीठासीन अधिकारी– यह मतदान अधिकारियों के सहयोग में मतदान केंद्र पर मतदान कार्य संपन्न कराता है। जिला निर्वाचन अधिकारी पीठासीन अधिकारियों एवं मतदान अधिकारियों की नियुक्ति करता है।

पर्यवेक्षक– निर्वाचन आयोग सरकारी पदाधिकारियों को संसदीय व विधानसभा चुनाव के लिए की नियुक्ति करता है।

चुनाव प्रक्रिया– लोक सभा व राज्य विधानसभा में हर 5 वर्ष में चुनाव होते हैं।

चुनाव लडने वाले उम्मीदवारों को चुनाव अभियान के लिए मतदान की तिथि से पहले 2 हफ्तेों का समय मिलता है। निर्वाचन आयोग यह सुनिश्चित करता है कि प्रत्येक मतदाता से मतदान केन्द्र की दूरी 2 कि.मी से अधिक न हो तथा 1500 से अधिक मतदाता 1 केन्द्र पर न हों। चुनाव खत्म होने के बाद चुनाव अधिकारी तथा पर्यवेक्षक की देखरेख में मतगणना की प्रक्रिया आरम्भ होती है।

61वे संशोधन 1988 के द्वारा 21 से 18 साल मतदाता की उम्र हुई थी जो 28 मार्च 1989 में लाहू हुआ था तथा आदर्श आचार संहिता 1991 में लागू हुई थी।

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